राज्य सरकार ने औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) को उत्कृष्टता केंद्रों में बदलने के लिए टाटा टेक्नोलॉजीज को शामिल किया है। इसी प्रकार, वैश्विक कंसल्टेंसी फर्म डेलॉइट को राज्य सरकार के 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य के अनुरूप राज्य के युवाओं के लिए भविष्य की कौशल रणनीति तैयार करने के लिए लगाया गया है।

दोनों ने सोमवार को व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमिता विभाग के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल के समक्ष विस्तृत रोडमैप और भविष्य की योजनाएं प्रस्तुत कीं।
प्रेजेंटेशन के दौरान, टाटा टेक्नोलॉजीज के प्रतिनिधियों ने राज्य के औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) के आधुनिकीकरण और उन्हें ‘उत्कृष्टता केंद्र’ (सीओई) के रूप में विकसित करने की प्रगति को साझा किया।
प्रेजेंटेशन में इस बात पर प्रकाश डाला गया कि आधुनिक मशीनरी, ई-लर्निंग प्लेटफॉर्म, ऑटोमेशन और इंडस्ट्री 4.0-आधारित प्रौद्योगिकियों के माध्यम से युवाओं को उद्योगों की वर्तमान और भविष्य की जरूरतों के अनुसार प्रशिक्षित किया जा रहा है ताकि वे न केवल राष्ट्रीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी रोजगार सुरक्षित कर सकें।
डेलॉइट के विशेषज्ञों ने राज्य को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में कौशल विकास और व्यावसायिक शिक्षा की रणनीतिक भूमिका पर एक प्रस्तुति दी।
भविष्य में नौकरी के रुझान, उद्योग की मांग और निवेश-आधारित रोजगार सृजन मॉडल का विश्लेषण करते हुए, डेलॉइट ने सुझाव दिया कि कौशल विकास योजनाओं को सीधे औद्योगिक निवेश और उभरती प्रौद्योगिकियों से जोड़ा जाना चाहिए, जिससे युवाओं को अधिक रोजगार और स्वरोजगार के अवसर मिल सकें।
बैठक के दौरान अग्रवाल ने अधिकारियों को दोनों संस्थाओं द्वारा प्रस्तुत कार्ययोजनाओं एवं सुझावों को तेजी से धरातल पर क्रियान्वित करने के निर्देश दिये, ताकि प्रदेश का हर युवा आधुनिक कौशल हासिल कर आत्मनिर्भर बन सके और प्रदेश की आर्थिक प्रगति में सक्रिय योगदान दे सके।
अग्रवाल ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य केवल डिग्री धारकों को तैयार करना नहीं है, बल्कि उद्योग के लिए तैयार पेशेवर तैयार करना है ताकि राज्य देश की सबसे बड़ी कौशल राजधानी के रूप में उभर सके।