कलकत्ता उच्च न्यायालय ने गुरुवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के मतगणना केंद्रों से संबंधित अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (एआईटीसी) नेताओं द्वारा दायर दो याचिकाओं को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया कि उसे दो रिट याचिकाओं में कोई “अवैधता” या “योग्यता” नहीं मिली।

न्यायमूर्ति कृष्ण राव की पीठ टीएमसी विधायक कल्याण बनर्जी और टीएमसी विधायक और राज्य मंत्री जावेद खान द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी।
टीएमसी सांसद और वरिष्ठ वकील बनर्जी ने 30 अप्रैल को पोल पैनल द्वारा जारी एक संचार में एक खंड को चुनौती दी, जिसमें कहा गया था कि “प्रत्येक गिनती टेबल पर गिनती पर्यवेक्षक और गिनती सहायक में से कम से कम एक केंद्र सरकार / केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम (पीएसयू) का कर्मचारी होगा”।
बनर्जी ने अदालत को बताया, “पश्चिम बंगाल के अतिरिक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बिना किसी अधिकार क्षेत्र के विवादित संचार जारी किया था।”
चुनाव पैनल की ओर से पेश वरिष्ठ वकील जिष्णु चौधरी ने अदालत को बताया, “याचिकाकर्ता ने यह स्थापित करने के लिए कोई दस्तावेज नहीं दिया है या यह साबित करने के लिए कोई सबूत पेश नहीं किया है कि अगर केंद्र सरकार/केंद्रीय पीएसयू कर्मचारियों को गिनती पर्यवेक्षकों/मतगणना सहायकों के रूप में नियुक्त किया जाता है, तो याचिकाकर्ता किसी भी तरह से पूर्वाग्रहग्रस्त होगा।”
पीठ ने कहा, “इस अदालत को वर्तमान रिट आवेदन में कोई योग्यता नहीं मिली। तदनुसार, याचिका खारिज की जाती है।”
पीठ ने एक अन्य याचिका भी खारिज कर दी जिसमें खान ने अदालत में सवाल उठाया था कि क्या कोई रिटर्निंग ऑफिसर (आरओ) मतगणना केंद्र का स्थान बदल सकता है।
न्यायमूर्ति राव ने कहा, “इस अदालत को गीतांजलि स्टेडियम से विहारीलाल कॉलेज में मतगणना केंद्र स्थानांतरित करने में कोई अवैधता नहीं मिली।”